गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

गोपाल बाबू गोस्वामी के गीतों में उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय एकता का संदेश

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर कलाकार अपनी कला के माध्यम से जनता का मनोरंजन तो करता ही है पर उसके साथ ही वह समाज को कुछ ना कुछ संदेश अवश्य देता है। कुमाऊनी के प्रसिद्ध लोकगायाक गोपाल बाबू गोस्वामी जी एक महान गायक व गीतकार होने के साथ-साथ उत्तराखण्ड के कुमाऊं एवं गढ़वाल अंचलों की एकता के प्रतीक भी हैं। अपनी रचनाओं उन्होने इस पहाड़ी प्रदेश के दोनों अंचलों को अपने गीतों में बराबर मह्त्व दिया है। इस मामले में वह अपने समकालीन या आजकल के गायक/गीतकारों से अलग नजर आते है जो एक क्षेत्र विशेष तक सिमट कर ही रहे हैं। अब आप उनके इस गीत को ही देख लिजिए:
हिमाला को उंचा डांना, प्यारो मेरो गांव,
हिमाला को उंचा डांना, प्यारो मेरो गांव,
छबीलो गढ़देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं ।
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यो भुमि जनम मेरा, माधोसिंह मलेखा
यो भुमि जनम मेरा, माधोसिंह मलेखा,
गबर, चन्दर सिंह, आजादी का पैदा.
मिटायो जुलम तैको, दिखायो उज्यावो - २
छबीलो गढ़देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥
छबीलो गढ़देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥
Himala ko Uncha Dana
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अपने उक्त गीत में गोस्वामी जी ने दोनो ही अंचलों को बराबर महत्व दिया है। तथा आजकल उनके इस गीत की पंक्ति "छबीलो गढ़देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं", उत्तराखण्ड राज्य की पहचान के रूप प्रयोग की जाती है।

इसी तरह गोस्वामी जी के इस देवी भजन की पंक्तियां देखिये, उन्होने किस प्रकार उत्तराखण्ड की प्रत्येक शक्तिपीठों को अपने भजन की पंक्तियों में पिरोया है:
दुर्गा भवानी, सुफल फलीए माँ, तेरी खुटी परणामा, छाई करिए माँ । -२

हे...... दूनागिरि शेरावायी, कायीगाड़ै की काली, दूनागिरि शेरावायी, कायीगाड़ै की काली।
थिरचौरै अगनेरी की देवी, करी दिये छाई, देघाटै की माता रांणी, मानिलै भवानी ।
गर्जिये उपटा देवी, माता शेरावायी॥
चन्द्रबदनी सुफल है जये, मैया.., छाई करिए माँ
कालीमठै की काली, तू लाज धरिये मां।
कालीमठै की काली, तू लाज धरिये मां।
दुर्गा भवानी, सुफल फलीए माँ, तेरी खुटी परणामा, छाई करिए माँ ।-२

हो ..... मनसा देवी हरिद्वारै की, मनसा देवी हरिद्वार की, देवी धुरै की बाराही।
तेरी खुटी हाथ जोड़नु, धरि दिये पत्ती।
गंगोली की महाकाली, गुरना की.. भवानी।
रक्षा कर दिए माता, हे शेरावायी।
हे दुर्गा भवानी, तू छाई करिए माँ, तेरी खुटि परणामा, तू छाई करिए माँ। -२
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गोस्वामी जी का यह प्रसिद्ध माता भजन देखियेगा .......
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जै मय्या दुर्गा भवानी, जै मय्याऽऽऽऽऽ..............

तेरी सिंहै की माता सवारी-२,
हाथ चक्र सुदर्शन धारी,
डाणा-काना में है रौछ वास -२,
पुर्णागिरी में जली रे जोतऽऽऽऽऽ
जै मय्याऽऽऽऽऽऽऽ...........................................

तेरी जैकार माता उपटा -२
तेरी जै-जै हो देवी का धुरा,
तेरी जैकार माता उपटा,
तेरी जै-जै हो देवी का धुरा,
तेरी जैकार माता गंगोली,
तेरी जैकार कायगाड़ काली
जै मय्याऽऽऽऽऽ ............................

दूनागिरी की सिंहवाहिनी-२,
तेरी जैकार चन्द्रबदनी,
दूनागिरी की सिंहवाहिनी,
तेरी जैकार चन्द्रबदनी,
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तेरी जैकार हे माता नन्दा,
तेरी जैकार देवी मानिला,
तेरी जैकार हे माता नन्दा,
तेरी जैकार देवी मानिला,
जै मय्याऽऽऽऽऽ..............................
Jai Mayya Durga Bhawani
Jai Mayya Durga Bh...
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ऎसे ही गोस्वामी जी ने कुछ गढ़वाली गीत भी गाये हैं।
Rami Baurani
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गढ़वाली की प्रसिद्ध लोकगाथा "रामी बौराणी" को अपने ओजपूर्ण स्वर में गाकर उन्होने इस गाथा को जैसे अमर ही कर दिया है।

pahad ki meeti -2 boli
pahad ki meeti -2 ...
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इस प्रकार हम देखते हैं कि गोपाल बाबू गोस्वामी जी एक सुरीली आवाज के धनी गायक (हाई पिच में अपने गीतो से वो सारे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे), अच्छे गीतकार, संगीतकार होने के साथ-साथ पहाड़ की एकता के लिए भी हमेशा प्रयत्नशील रहे थे। उन्होने अपने गीतों में कुमाऊं तथा गढ़वाल अंचल को बराबर महत्व दिया है।